• Aajtak | 28-May-2021 14:40

    लोकतंत्र के ‘शहीद’: UP पंचायत चुनाव में जान गंवाने वाले टीचरों की कहानियां!

    कोशिश ये अहसास कराने की है कि किसी की मौत सिर्फ सांसों का रुक जाना,धड़कनों का थम जाना भर नहीं होती. वो महज कोई सरकारी आंकड़ा भी नहीं होता बल्कि ताउम्र चलने वाला गम होता है. दिल और दिमाग पर लगा ऐसा घाव होता हà¥

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